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ट्रैफ़िक नियम, भारतीय दंड संहिता से जुड़े विषय स्कूल,कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए- एसीपी शिरसाट
Wednesday, February 3, 2016 - 10:09:30 AM - By प्रस्तुति- राहुल दुबे

ट्रैफ़िक नियम, भारतीय दंड संहिता से जुड़े विषय स्कूल,कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए- एसीपी शिरसाट
राहुल दुबे एवं एसीपी पंकज शिरसाट

पंकज शिरसाट बड़े ही सख़्त मिज़ाज और समय के पाबंद व कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति हैं। इनका चयन सीधे मुखयमंत्री के खेल कोटे से 2013 में हुआ। यें कब्बडी के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी हैं। इस समय ये ट्रैफ़िक ज़ोन (छ:) के सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर हैं। इनके हाथ में कार्यभार आते ही ज़ोन के अंतर्गत ट्रैफ़िक नियमों को लेकर जनता में बदलाव देखा जा रहा है।

पंकज शिरसाट (ACP) से हुए संवाद के कुछ मुख्यांश :~

राहुल - आपको पुलिस में आने के लिए प्रेरणा कहाँ से मिली?

शिरसाट - दरसल मैं पहले से ही पुलिस के लिए काम करता था। लेकिन मुझे कहीं न कहीं ऐसा लगता की पुलिस में नहीं हूँ इसलिए कुछ रुकावटे आ रही है। जब मुख्यमंत्री सर ने मुझे चुना तो उन्होंने कहा प्रथम श्रेणी की कोई भी पद जो पसंद हो उस पर तुम्हें नियुक्त कर देता हूँ बोलो, तो मैंने कहा कि सर पुलिस में... उन्होंने मुझे सहायक पुलिस आयुक्त पद का भार सम्हालने के लिए नियुक्त किये । मेरा लक्ष्य कानून व्यवस्था बनाये रखना साथ ही खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देना है, इस वजह से आज मैं यहाँ हूँ।

राहुल- यातायात नियमों को तोड़ने की वजह क्या है? इसे रोकने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

शिरसाट- यातायात नियमों को तोड़ने या उसक पालन न करने की सबसे बड़ी वजह अनुशासन हीनता व समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह न करना है। नियमों का पालन न करके अपने जान को तो जोख़िम डालते ही हैं, साथ ही दूसरों के लिए भी ख़तरा पैदा करते हैं। इसे रोकने के लिए हम सड़क सुरक्षा अभियान चला रहे हैं। इसके अंतर्गत हम नियम तोड़ने वालों को समझाते हैं, और उन्हें उनके परिवार समाज के प्रति जिम्मेदारियों का ऐहसास कराते हैं।

राहुल- सड़क सुरक्षा अभियानों का लोगों पर असर पड़ता दिख रहा है?

शिरसाट- हाँ, बदलाव तो आया है। पहले सिर्फ 50 प्रतिशत लोग ही नियमों का पालन करते थे। लेकिन जबसे हम और हमारे साथ मिलकर स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी सड़क सुरक्षा अभियान चला रहे हैं, तब से 90 प्रतिशत लोग नियमों का पालन करते दिख रहे हैं। इस सफलता का श्रेय मैं विद्यार्थियों को देता हूँ कि इन्होंने लोगों को जागरूक करने में हमारी सहायता की।

राहुल- जुर्माने की राशि को बढ़ा देंने से जनता नियमों का पालन करेगी या भ्रष्टाचार बढ़ेगा?

शिरसाट- यदि लोगों में अनुशासन आजाए तो जुर्माने की राशि बढ़ने की क्या नियमों की भी जरुरत नहीं पड़ेगी। सवाल रहा भ्रष्टाचार के बढ़ने का तो ये जनता के हाथ में है। अगर जनता नियमों का पालन करगी तो राशि बढ़ाने की कोई जरूरत ही नहीं।

राहुल- ऐसा मानना है की, भ्रष्टाचार जनता के वजह से बढ़ता है आपका क्या मानना है?

शिरसाट- नहीं, पूरी तरह से जनता इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। जिम्मेदार वो भी है जो उस वक्त वहाँ तैनात है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन करे तो जनता कितना भी चाहे भ्रष्टाचार नहीं बढ़ेगा। लेकिन इसे हम अपना दुर्भाग्य ही समझे की कुछ लोगों के वज़ह से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है।

राहुल- ट्रैफ़िक बढ़ने की वज़ह क्या है?

शिरसाट- पार्किंग लार्ट न होना, साथ ही निजी वाहन भी! लेकिन जनता चाहे तो इससे हम निपट सकते है। जितना हो सके सार्वजनिक यातायात के साधनों का उपयोग करें। पर्यावरण के साथ प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी। हमारी आने वाली पीढ़ी को जीवनयापन करने में सहायक सिद्ध होगा।

राहुल- अवैध तरीके होने वाले बाइक रेसिंग को रोकने के लिए आप क्या कर रहे है?

शिरसाट- बाइक रेसिंग को रोकने के लिए हम पश्चिम द्रुतगामी मार्ग पर रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक जगह-जगह नाका बंदी कर रेसिंग करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाही कर रहे हैं। रेसिंग करने वाले ज़्यादातर कॉलेज विद्यार्थी और पैसो वाले के बच्चे होते है। इनके भविष्य के बारे सोच कर इनके परिवार वालो बुला कर इन्हें सझाकर छोड़ देते हैं। फिर भी कई बच्चे दोबारा रेसिंग करते पकड़े जाते हैं और उनपर सख़्त कार्रवाही कि जाती है।

राहुल- क्या ट्रैफ़िक नियम, भारतीय दंड संहिता से जुड़े विषय स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए?

शिरसाट- हाँ, 10 वी से स्नातक तक के कक्षाओं में पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। क्योंकि पहले नैतिकता थी। लेकिन इस समय समाज में नैतिकता का अभाव है। यदि हम अभी से कुछ नहीं किये तो आगे चलके हम और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

राहुल- दिनों-दिन ट्रैफ़िक बढ़ती जा रही है, पुलिस बल को और बढ़ाना चाहिए?

शिरसाट- नहीं मेरा मानना है, कि पुलिस बल को बढ़ाने के बाजए हमें समाज में रह रहे लोगों में अनुशासन लाना चाहिए ।अगर ऐसा करने में हम सफल होते हैं, तो पुलिस बल की क्या ज़रूरत। पुलिस बल को बढ़ानें में अधिक धन व्यय होने के साथ ही कई संसाधनों का वेवजह उपयोग होगा। इस वेवजह के व्यय करने से अच्छा है की इस धन और बल को हम देश व समाज के विकास में खर्च करें।

राहुल- समाज व नौजवानों को आप क्या संदेश देना चाहते हैं?

शिरसाट- समाज अपने कर्तव्यों का निर्वाह करें। नौजवान अपने जोस व साहस का सही जगह उपयोग कर देश व समाज के विकास में योगदान दे। जो नवयुवक रेसिंग करते है,वो करें लेकिन सही जगह। रेसिंग अकैडमी में नाम डलवाये और ट्रेनिंग लेकर एक खिलाड़ी के रूप में अपना और देश का नाम रोशन करें।