Sunday, January 29, 2023

न्यूज़ अलर्ट
1) हिंदी दिवस का आयोजन............ गरवारे में वक्तृत्व स्पर्धा और परिचर्चा संपन्न.... 2) राज्यपाल ने जारी किया ​फिल्म '​भारत के अग्निवीर​'​ का पोस्टर .... 3) श्रीलंका के राष्ट्रपति को स्वयं और परिवार की सुरक्षा का डर, गारंटी स्वरूप सुरक्षित बाहर जाने की रखी शर्त। .... 4) मुंबई में बढ़ते कोरोना केस के बाद सड़कों पर फिर दिखेंगे क्लीन-अप मार्शल?.... 5) पैगंबर साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद नूपुर शर्मा की बढ़ती मुश्किलें .... 6) महाराष्ट्र में आ गई कोरोना की चौथी लहर?.... 7) गरवारे शिक्षण संस्थान-'विश्व पर्यावरण दिवस' पर वृक्षारोपण और पोस्टर प्रतियोगिता....
वर्तमान बेहतर तो भविष्य भी होगा बेहतर / वंदना सिंह
Friday, December 9, 2022 - 2:27:42 PM - By वंदना सिंह

वर्तमान बेहतर तो भविष्य भी होगा बेहतर / वंदना सिंह
भविष्य के बारे में सोचना केवल वर्तमान की गतिविधियों की योजना बनाने में उपयोगी है
यह दौर आधुनिकता है। आधुनिकता की दौड़ है तो तनाव भी होगा। अगर तनाव बढ़ता जाता है तो उसकी चपेट में आए लोग अपने मन की शांति खो देते हैं। यह सच है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी आतंरिक शांति खोते जा रहे हैं। हालांकि आंतरिक शांति संभव है और इसे खोजने के लिए किसी पहाड़ की चोटी पर ध्यान लगाने की आवश्यकता नहीं है। बस मानसिक आराम करने के लिए समय निकालना सबसे मुश्किल है। जिम्मेदारियों के मकड़जाल ने सब कुछ अस्त व्यस्त कर दिया है। सभी को सबसे अधिक शांति की आवश्यकता होती है। खासकर तब यह रोजमर्रा की जिंदगी की उन्मत्त गति के बीच फंसा हुआ वह एक ऐसा पेंच है, जिस क्षण आप मानसिक दबाव में होते हैं। पारिवारिक, व्यावसायिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने में आप उस बोझ को अपने ऊपर लादते चले जाते हैं। ख्याल ही नहीं रहता कि आपको अपने भीतर आंतरिक शांति खोजने की भी जरूरत होती है, ठीक वैसे ही जैसे शरीर से जुड़े किसी विकार के लिए आप डॉक्टर के पास जाते हैं। यहां तो कुछ ही पल खुद को देकर मन शांत किया जा सकता है।
वैसे माना यह जाता है कि आंतरिक शांति की भावना प्राप्त करने में मदद करने के लिए लोग परिस्थितियों की तलाश करते हैं। हम में से हर कोई यह जानता है कि हमें खुद से प्यार करना चाहिए लेकिन अक्सर हम ऐसा करने में असफल हो जाते हैं। भीतर की असुरक्षा उसका सबसे बड़ा कारण है। ऐसा कोई इंसान नहीं जो इन बातों से इनकार कर सके और जो यह कह सके कि उसके भीतर असुरक्षा की भावना नहीं। शायद इसीलिए आत्मशांति दुनिया भर के अंतर्मुखी लोगों के लिए एक गहन प्रश्न भी है और लक्ष्य भी है। आंतरिक शांति की आजीवन खोज हमें ऋतुओं के साथ विकसित होने की अनुमति देते हुए अपने बारे में अधिक जानने की चुनौती देती है। हर वह व्यक्ति अतीत और वर्तमान का निर्माता होने का दावा करता हो इस बात से सहमत होगा कि शांति के लिए एक शांतचित्त यात्रा की आवश्यकता होती है जो आपके साथ आपके भीतर से शुरू होती है। एक फार्मूला याद रखना चाहिए कि, 'यदि आप उदास हैं तो आप अतीत में जी रहे हैं, यदि आप चिंतित हैं तो आप भविष्य में जी रहे हैं और यदि आप शांति में हैं तो आप वर्तमान में जी रहे हैं।' दरअसल केवल वर्तमान ही महत्वपूर्ण है। हाँ, पिछले अनुभवों का एकमात्र लाभ यह है कि जो सीखा है उसका उपयोग वर्तमान को सुगम बनाने के लिए किया जा सकता है।
भविष्य के बारे में सोचना केवल वर्तमान की गतिविधियों की योजना बनाने में उपयोगी है। अतीत या भविष्य के बारे में सोचने वाला मन वर्तमान पर उचित ध्यान देना मुश्किल बना देता है। इसलिए हमें बस वर्तमान में जीना चाहिए। उसी को ठीक तरह संजोने और संभालने में अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। आगे और पीछे की बाते सोचने में हर्ज नहीं, पर उनकी मर्यादा उतनी ही रहनी चाहिए, जो वर्तमान से तालमेल खाती हो। आज जो संभव है, उसी को अधिक अच्छा बनाने का प्रयत्न करने में भलाई है। भविष्य अपने आप बेहतर हो जाएगा। जीवन का यही अप्रोच आत्मशांति और आंतरिक शांति के लिए सहायक होता है। यह काम मुश्किल नहीं है, बस इच्छाशक्ति का होना जरूरी है।