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इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं.......! / सैयद सलमान
Friday, April 30, 2021 1:22:50 PM - By सैयद सलमान

पाकिस्तान के कई राजनेता, फ़िल्म स्टार, खिलाड़ियों और उलेमा समेत आम लोगों ने भी भारत के लिए दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का संदेश भेजा है।
साभार- दोपहर का सामना 30 04 2021

अमूमन पाकिस्तान से भारत को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित नकारात्मक ख़बरें आती रहती हैं। शायद यही एकमात्र उपाय होता है जिसे दिखाकर वहां की सरकारें अपना उल्लू सीधा करते हुए अवाम को मूल मुद्दों से भटकाती रहती हैं। लेकिन इन दिनों सरहद के दोनों तरफ़ दोनों हमसाए कोरोना वायरस के क़हर से एक जैसी परेशानी में मुब्तिला हैं। हालांकि इसे क़ुदरत के क़हर का असर कहिये या दुःख को समझने की बढ़ती सलाहियत कि, अब पाकिस्तान से भी भारत के प्रति भावनात्मक और पुरसुकून ख़बरें आ रही हैं। आम भारतीयों के लिए पाकिस्तान में दुआएं की जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी मीडिया में भी भारत में कोरोना के बिगड़ते हालात पर अच्छी-ख़ासी चर्चा हुई है। यहां तक कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय के दफ़्तर में बुलाकर आधिकारिक रूप से उन्हें पाकिस्तान की तरफ़ से मानवीय आधार पर भारत को मदद की पेशकश भी की है। पाकिस्तान भारत को वेंटिलेटर, एक्स-रे मशीन, बाईपैप, मास्क और ज़रूरत की हर वस्तु अन्य मदद के साथ वाघा बॉर्डर के ज़रिए भेजने को तैयार है। दरअसल भारत में इन दिनों कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने सभी को हैरान परेशान कर दिया है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मरीज़ों की जान जा रही है। पाकिस्तान सहित विदेशी मीडिया भी भारत से आ रही इन ख़बरों को लेकर चिंतित है। पाकिस्तान के कई राजनेता, फ़िल्म स्टार, खिलाड़ियों और उलेमा समेत आम लोगों ने भी भारत के लिए दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का संदेश भेजा है।

सबसे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक ट्वीट कर कोरोना संक्रमण से परेशान भारत के लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और मानवता के सामने इस वैश्विक चुनौती का मिलकर सामना करने की बात कही। फिर तो सिलसिला ही चल निकला। पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने एक वीडियो जारी कर भारत के साथ हमदर्दी जताई। उनका वीडियो देश भर में ख़ूब वायरल हुआ। शोएब अख़्तर ने भारत के लिए कोरोना से लड़ने के लिए दुआएं मांगते हुए अपने वीडियो संदेश के ज़रिये इस मुश्किल घड़ी में भारत के साथ खड़े होने और ग्लोबल सपोर्ट मुहैया करने की गुज़ारिश की। उन्होंने अपनी सरकार से भी अपील की, कि भारत को ऑक्सीजन की सप्लाई कराने में मदद करें। साथ ही उन्होंने अपने मुल्क के लोगों से भी भारत के लिए दुआएं करने को कहा। एक अन्य पाकिस्तानी क्रिकेटर और हिंदुस्थानी टेनिस स्टार खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा के शौहर शोएब मलिक ने इसी बीच एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, 'इन कठिन समय में भारत के लिए मेरी प्रार्थना, अल्लाह हमें कोविड की दूसरी लहर की अभूतपूर्व त्रासदियों से निपटने में मदद करें। भारत हिम्मत बनाए रखो।' एक अन्य क्रिकेटर बाबर आज़म ने ट्वीट किया कि, 'यह समय एकजुटता दिखाने का है और इस मुश्किल भरे समय में हम भारत के लिए प्रार्थना करते हैं।' गायक और एक्टर अली ज़फ़र का यह कहना कि, 'इस मुश्किल वक़्त में हम अपने पड़ोसी देश के साथ हैं, क्योंकि इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं है', लोगों के दिलों को छू गया। इन सेलिब्रिटीज़ के साथ-साथ पाकिस्तान में सबसे सम्मानित मरहूम अब्दुल सत्तार एधी नामक प्रसिद्ध इंसानी ख़िदमतगार द्वारा स्थापित एनजीओ एधी फ़ाउंडेशन ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर घातक और जानलेवा वायरस से लड़ने में मदद करने और देश की सहायता के लिए के पूरी तरह से सुसज्जित ५० एम्बुलेंस का एक बेड़ा और सहायक कर्मी मुहैया कराने की पेशकश की है।

ऐसा नहीं है कि केवल राजनेता, अधिकारी, खिलाड़ी या सेलिब्रिटी ही भारत के हक़ में दुआएं कर रहे हैं, इस मामले में पाकिस्तान के कुछ उलेमा और मुफ़्ती भी आगे आए हैं। पाकिस्तान के मशहूर धर्मगुरु मुफ़्ती तारिक़ मसूद ने इस मामले में आश्चर्यजनक तरीके से भारतीयों के हक़ में दुआ की अपील की है। उन्होंने रमज़ान के मुक़द्दस महीने का हवाला देते हुए कहा है कि इस वक़्त भारत को दुआओं और चिकित्सकीय सहायता की शदीद ज़रूरत है। उन्होंने भारत के लिए रमज़ान की रातों में उठ कर ईश्वर से गिड़गिड़ाकर दुआ करने की भावुक अपील की है। इसे उन्होंने इंसानी जज़्बा बताया है। उनका यह वीडियो भी ख़ूब वायरल हो रहा है। दरअसल भारत कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जंग लड़ रहा है। देश में बीते कई दिनों से हर रोज़ तीन लाख से ज़्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। मरीज़ों की संख्या में लगातार होते इज़ाफ़े के कारण अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन की भारी क़िल्लत है। ऐसे में कट्टरपंथी पाकिस्तान से भारत के लिए भावनात्मक अपीलें आना महत्व रखता है। पाकिस्तान ख़ुद भी कोरोना की चपेट है। वहाँ की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। लेकिन शायद एक जैसे ग़म ने उन्हें भी इंसानियत का सबक़ सिखा दिया है।

दरअसल पाकिस्तान कभी इंसानियत की राह पर चला ही नहीं। आतंक को बढ़ावा देना, भारत के अंदरूनी मसलों में टांग अड़ाना और अस्थिर करने का प्रयास करते रहना उसका प्रिय शग़ल रहा है। ऐसे में अचानक उसकी अवाम, नेता, खिलाड़ी, कलाकार और धर्मगुरुओं का इंसानियात की बात करना आश्चर्यजनक तो है लेकिन स्वागतयोग्य भी है। दरअसल अगर वो सही इस्लाम के मानने वाले होते तो बुराइयों से दूर रहकर वही करते जो आज कर रहे हैं। पाकिस्तानियों ने अपने मुल्क का नाम पाकिस्तान अर्थात 'पाक स्थान' तो रख लिया था मगर कभी पाक-पवित्र रास्ते पर चले नहीं। उन्होंने कभी मानवता के लिए एक मॉडल का रूप माने जाने वाले पैग़म्बर मोहम्मद साहब के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास शायद ही किया हो। मोहम्मद साहब ने कभी भी किसी शत्रु को शाप नहीं दिया, हालांकि उन पर ज़बरदस्त ज़ुल्म तक किया गया था। जबकि मोहम्मद साहब की शिक्षा के विपरीत पकिस्तान ने हमेशा नफ़रत की खेती की और लाशों के अंबार लगाए। आतंकवाद को प्रश्रय देने में पाकिस्तान का सबसे बड़ा रोल रहा।

पैग़म्बर मोहम्मद साहब की शिक्षा के मुताबिक़ सच्चे मुसलमान की पहचान यही है कि उसका दिल नर्म होना चाहिए और स्वभाव से उसे दयालु होना चाहिए। क्या इस से पहले कभी पाकिस्तान ने इस बात पर गौर किया था कि असल में मोहम्मद साहब की सही तालीम है क्या? वैसे इस्लाम की मान्यता है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और जैसा कि उसी सर्वशक्तिमान के मुताबिक़ हर चीज़ के लिए एक समय निर्धारित किया गया है, शायद यही समय हो कि कोरोना महामारी के बहाने पाकिस्तान का ज़मीर जाग जाए। यह एक बड़ा सत्य है कि जब ज़िंदगी और मौत का सवाल हो, तो दो हमसायों का एक साथ खड़े होना और इंसानियत दिखाना बेहद ज़रूरी हो जाता है। शायद उसी इंसानी बुनियाद पर पाकिस्तान की नई पीढ़ी वहां की सरकार से कहती नज़र आती है कि जब दोनों देशों के लोग एक दूसरे को पसंद करते हैं और परवाह करते हैं तो लोगों को मिलने दीजिए, एक दूसरे को मदद करने दीजिए। हालांकि सच थोड़ा कड़वा ज़रूर है मगर सच यही है कि पाकिस्तान ने कभी ऐसी दरियादिली नहीं दिखाई थी। सच तो यह भी है कि इस महामारी में पाकिस्तान इस स्थिति में नहीं है कि भारत को कुछ दे पाए, लेकिन मदद की पेशकश भी करना उसकी मानसिकता बदलने का संकेत है। हालांकि उसकी असल परीक्षा इस महामारी के ख़त्म होने के बाद होगी। अगर उसका यही इंसानी रवैया क़ायम रहा तो शायद भारत के साथ उसके नए सिरे से रिश्ते बनने की शुरुआत हो अन्यथा यही समझा जाएगा कि कि केवल अल्लाह के अज़ाब नाज़िल होने के समय ही उसे इंसानियत याद आती है। इसलिए अभी इस विषय में कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। वो कहते हैं न, 'दूध का जला, छांछ भी फूंक-फूंक कर पीता है।'


(लेखक मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं। देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)