Monday, June 17, 2024

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शुरू होने जा रहा है,काकोरी एक्शन का शताब्दी वर्ष
Thursday, May 9, 2024 5:22:56 PM - By News Desk

Symbolic Picture
लखनऊः काकोरी एक्शन का शताब्दी वर्ष जल्द ही शुरू होने जा रहा है लिहाजा काकोरी केस के महानायकों से जुड़े जनपदों में शताब्दी वर्ष समारोह आयोजन को लेकर चंबल संग्रहालय (Chambal Museum) ने यूपी प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध दस्तावेजी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने सशस्त्र क्रांति का बीड़ा उठाने वाले लड़ाका पुरखों को शिद्दत से याद करने की अपील की। उन्होंने शहीद-ए-वतन अशफाक का शेर उठो-उठो सो रहे हो नाहक, पयाम-ए-बांगे जरस तो सुन लो,
बढ़ो कि कोई बुला रहा है निशान-ए-मंजिल दिखा-दिखा कर। उल्लेख करते हुए कहा कि हम तो जाग रहे हैं और समाज को भी जगाना है। चंबल म्यूजिम में काकोरी केस से जुड़ी तमाम फाइलें संरक्षित हैं। आजादी के इस स्वर्णिम इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है। लिहाजा गोरखपुर, अयोध्या, गोण्डा, शाहजहांपुर, बरेली, फर्रूखाबाद, कानपुर, सुल्तानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, औरैया, मुरैना, मेरठ, लखनऊ में ऐतिहासिक कार्यक्रम होना तय हुआ है। इन शहरों की और साथियों से बात कर आयोजन समिति बनाकर जल्द ही पूरा कैलैंडर जारी कर दिया जाएगा। शताब्दी समारोह का प्रारंभ 8-9 अगस्त 2024 को गोरखपुर से होगा और विभिन्न शहरो में आयोजन के बाद समापन 7-8 अगस्त 2025 को लखनऊ में होगा।

शहीदों की मजारों पे जुड़ेंगे हर बरस मेले,

वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।

प्रेस वार्ता के दौरान काकोरी एक्शन शताब्दी वर्ष समारोह का साझे तौर पर लोगो भी जारी किया गया। काकोरी ट्रेन डकैती से संबधित दस्तावेजों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के इस अवसर पर वक्ता वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल मिश्रा गुरु जी ने कहां सांस्कृतिक आन्दोलन के जरिए क्रांतिकारियों के बारे में आम जन को जागरूक करने की जरूरत है वहीं अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ शोध संस्थान फैज़ाबाद के निदेशक सूर्यकांत पांडेय ने कहा क्रांतिकारियों के नाम पर शहरों के नाम होना चाहिए । वहीं कार्यक्रम के इस अवसर पर रामकृष्ण खत्री के पौत्र रोहित खत्री,शैलेन्द्र सिंह परिहार (संयोजक चंबल परिवार ) प्रखर श्रीवास्तव (कानपुर ) मो.इमरान (सुल्तानपुर),उमेश चंद्रा,नवल किशोर सहित तमाम संस्कृति कर्मी और मीडियाकर्मी मौजूद रहे।
वहीं प्रेस वार्ता के अवसर पर बोलते हुए कार्यक्रम के मुख्य संयोजक चंबल परिवार प्रमुख डॉ . शाह आलम ने कहा काकोरी ट्रेन एक्शन हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के महज दस क्रांति योद्धाओं ने काकोरी के नजदीक ट्रेन रोककर फिरंगी सरकार को खुली चुनौती देते हुए सरकारी खजाना हथिया लिया था। इन पैसे से माऊजर खरीदना क्रांतिवीरों का मकसद था। बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने पूरी ताकत लगाकर दर्जनों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर दो चरणों में मुकदमा चलाया। मुकदमें में उन पांच क्रांतिकारियों को भी शामिल कर लिया गया जिनका काकोरी एक्शन से कोई वास्ता नहीं था लेकिन इससे पहले पीलीभीत में 25 दिसंबर 1924 बमरौली गांव, 9 मार्च 1925 को बिचपुरी गांव और प्रतापगढ़ में 24 मई 1925 द्वारकापुर गांव में एक्शन में थे। इसके अलावा बगैर किसी एक्शन में शामिल हुए सिर्फ एचआरए से जुड़े होने पर 11 क्रांतिकारियों पर अभियोग चलाकर लंबी-लंबी सजाएं दी गईं।

चंबल संग्रहालयः चंबल संग्रहालय की स्थापना सितंबर 2018 में हुई थी चंबल म्यूजियम समाज में बिखरे अमूल्य ज्ञान स्रोत सामग्री सहेजने के मिशन में जुटा है, सांस्कृतिक व बौद्धिक संपदा के संरक्षण के क्रम में चंबल अंचल और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, पत्र, गजेटियर, डाक टिकट, सिक्के, स्मृति चिन्ह, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें, तस्वीरें, वीडियो, पुरस्कार, सामग्री-निशानी, अभिनंदन ग्रंथ, पांडुलिपि आदि ऐतिहासिक महत्व और लोकजीवन से जुड़ी प्राचीन सामग्री संरक्षित की गई है। इन ज्ञानकोष से जहां चंबल संग्रहालय और समृद्ध हुआ है वहीं शोधार्थियों के लिए बीहड़ में एक खिड़की खुली है। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी मुकेश वर्मा ने किया।