Monday, June 17, 2024

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पहले चरण की वोटिंग में दिखी उदासीनता!
Sunday, April 21, 2024 - 1:39:45 AM - By News Desk

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भीषण गर्मी के बावजूद 18वीं लोकसभा और कुछ राज्य विधानसभा चुनाव-2024 के पहले चरण के मतदान में मतदाताओं ने कहीं उदासीन, कहीं बहिष्कार और कहीं उत्साहजनक प्रदर्शन किया, जैसे सबसे कम प्रतिशत मतदान बिहार में हुआ, जो राजनीतिक दलों इंडी और खासकर एनडीए एवं चुनाव आयोग केलिए चिंता का सबब बना है। आम चुनाव-2024 के लिए इंडी और खासकर एनडीए के चुनाव प्रचार में जो उत्साह दिख रहा है, उसे देखते हुए मतदान का प्रतिशत आशाजनक नहीं माना जा रहा है। इसका कारण जहां गर्मी हो सकता है वहीं उदासीनता भी समझी जा रही है। देश का आभिजात्य वर्ग इस बार भी मतदान करने में पीछे दिखाई दिया यानी वह या तो पिकनिक पर निकल गया या फिर यह कहकर समझकर घर से वोट देने नहीं निकला कि उनके एक दो वोट नहीं देने से क्या फर्क पड़ता है। ग़ौरतलब हैकि भारत निर्वाचन आयोग ने अधिकतम मतदान के लिए मतदाताओं में जागरुकता पैदा करने, उन्हें मतदान को प्रेरित करने या मतदान स्थल पर सुविधाएं प्रदान करने में कोई कमीं नहीं छोड़ी है, तबभी मतदाताओं में उदासीनता देखी गई है, मगर भारत निर्वाचन आयोग ने दावा किया हैकि भीषण गर्मी के बावजूद मतदाताओं ने पहले चरण में उत्साहपूर्वक भाग लिया है।
चुनाव के पहले चरण में सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की राज्य विधानसभाओं केलिए मतदान केसाथ लोकसभा चुनाव केलिए 10 राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद झड़पों और हिंसक घटनाओं के बीच मतदान हुआ। देशभर में कुलमिलाकर शांतिपूर्ण मतदान हुआ, जिसका का संभावित औसत आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदाताओं और चुनाव मशीनरी को मतदान कराने के लिए धन्यवाद दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार, निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने निर्वाचन सदन में ईसीआई मुख्यालय से सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रगति की लगातार निगरानी की। इस उद्देश्य केलिए मुख्यालय में एक अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, राज्य एवं जिलास्तर पर भी ऐसे ही नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं।
भारत निर्वाचन आयोग का कहना हैकि विविधताओं से भरे भारतदेश में पहले चरण में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने बढ़चढ़कर मतदान करके लोकतंत्र की जीवंत तस्वीरें पेश कीं। भीड़-भाड़ वाले शहरी केंद्रों से लेकर दूरदराज़ के गांवों तक मतदान केंद्रों पर पीढ़ियों और विभिन्न पृष्ठभूमि वाले मतदाताओं का रंगारंग जमावड़ा दिखाई दिया। चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों ने क्षेत्र में सावधानीपूर्वक योजना एवं कार्यांवयन के साथ निर्बाध मतदान की व्यवस्था की थी। जनजातीय भीतरी इलाकों में मतदान सुविधा पर चुनाव आयोग के ध्यान केसाथ छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में समुदायों ने शांति और लोकतंत्र का रास्ता चुनते हुए बुलेट के बजाय बैलट की शक्ति को अपनाया। पहले चरण के मतदान में ऐसी कई तस्वीरें देखने को मिलीं जैसे लोकसभा चुनाव में बस्तर के 56 गांव के मतदाताओं ने पहलीबार अपने ही गांव में बने मतदान केंद्र पर वोट डाले।
बीजापुर के मॉडल मतदान केंद्र पीसी-163 में मतदाताओं को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलता देखा गया। गढ़चिरौली-चिमुर महाराष्ट्र में हेमलकासा बूथ पर स्थानीय जनजातीय बोली का उपयोग किया गया। बिहार के बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं को मुस्कुराते हुए और अपनी उंगलियों पर गौरव का प्रदर्शन करते हुए देखा गया। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में आदिवासी समुदाय के मतदाता बड़ी संख्या में मतदान करने केलिए बाहर निकले। ग्रेट निकोबार की शोम्पेन जनजाति ने चुनाव-2024 में पहलीबार वोट डालकर इतिहास रचा। मिजोरम में एक बुजुर्ग जोड़े ने एकसाथ मतदान करने का अपना संकल्प दोहराया। अरुणाचल प्रदेश में एक बुजुर्ग महिला घर पर मतदान की सुविधा होने के बावजूद अपनी इच्छा से पैदल चलकर मतदान केंद्र तक पहुंची। देश के अधिकांश हिस्सों में मतदाताओं ने गर्मी का सामना किया, जबकि कई हिस्सों में मतदाता भारी बारिश केबीच धैर्यपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए।