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मन की शक्ति व पूर्वाभास साधना और इसके लाभ
Thursday, August 22, 2019 - 9:06:34 PM - By आचार्य रजनीश मिश्रा

मन की शक्ति व पूर्वाभास साधना और इसके लाभ
सांकेतिक चित्र

इसे परा मनोविज्ञान का सर्वोच्च विषय भी माना है। असल में यह संवेदी बोध का मामला है।
गहरे ध्यान प्रयोग से यह स्वतः ही जाग्रत हो जाती है। मेमॉरिस्म या हिप्नोटिस्म जैसी अनेक विद्याये इस छठी इंद्री जाग्रत होने का ही परिणाम है।

क्या और शरीर में कहा है छठी इंद्री

मस्तिष्क के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है। उसे ब्रह्मरंध्र कहते है।
वही से सुषुम्ना रीढ़ से होती हुई मूलाधार तक गई है। सुषुम्ना नाड़ी जुड़ी है सहस्रकार से इड़ा नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित है। तथा पिंगला नाड़ी दायी तरफ अर्थात इड़ा नाड़ी में चंद्र स्वर और पिंगला नाड़ी में सूर्य स्वर स्थित रहता है।

सुषुम्ना मध्य में स्थित है जब नाक से दोनों स्वर चल रहे हो तब माना जाता है की सुषुम्ना नाड़ी सक्रिय है। इस सक्रियता में ही छठी इंद्री जाग्रत होती है।
इड़ा पिंगला और सुष्मना के अलावा हमारे शरीर में हजारो नाडिया होती है।
सभी नाड़ियो की शुद्धि और सशक्तिकरण सिर्फ प्राणायाम और आसन द्वारा ही होता है। शुद्धि और सशक्तिकरण का अभ्यास सीखकर आप आगे की ओर बढ़ेगे।

जाग्रत कैसे करे छठी इंद्री

यह इंद्री सभी में सुप्तावस्था में होती है। भृकुटि के मध्य निरन्तर और नियमित ध्यान करते रहने से आज्ञाचक्र जाग्रत होने लगता है। जो हमारे सिक्थ सेन्स को सक्रीय कर देता है।
योग में त्राटक और ध्यान की कई विधियों में किसी एक को भी चुनकर आप इसका अभ्यास शुरू कर सकते है।

ज्योतिषी रजनीश मिश्रा
मो.नं -9029512777