Tuesday, April 7, 2020

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गरवारे शिक्षण संस्थान में 'पत्रकारिता, तब और अब' पर परिचर्चा 
Thursday, March 12, 2020 6:49:38 PM - By विनय सिंह

गुरुजनों और विद्यार्थियों के साथ वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन सरल
मुंबई के जाने माने शिक्षण संस्थानों में गरवारे शिक्षण संस्थान का नाम सम्मान से लिया जाता है। देश को अनेक गणमान्य पत्रकार देने वाले शिक्षण संस्थान में 'पत्रकारिता तब और अब' विषय पर परिचर्चा और परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस वर्ष अब तक कई गणमान्य पत्रकारों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा चुका है। इस बार मुख्य अतिथि के रूप में जाने–माने साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन सरल जी को आमंत्रित किया गया।
मनमोहन सरल जी का जन्म आज़ादी से पूर्व हुआ था। सरलजी के अनुभव का पूरा लाभ लेने के लिए ही गरवारे हिंदी पत्रकारिता के समन्वयक सरोज त्रिपाठी जी और सैयद सलमान जी ने सरल जी को आमंत्रित किया था। कार्यक्रम को दो सत्रों में विभाजित किया गया था। पहले सत्र में अतिथियों का स्वागत किया गया और सरल जी का जन्मदिन मनाया गया। जलपान के बाद द्वितीय सत्र का आरंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन कर रहे छात्र प्रतिनिधी विनय सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और श्री सरोज त्रिपाठी जी से मनमोहन सरल जीे का विस्तृत परिचय कराने का अनुरोध किया। सरोज जी ने मनमोहन सरल का परिचय कराते हुए बताया कि बचपन से जिनकी रचनाएं पढ़कर बड़ा हुआ और जिनसे मिलने की इच्छा होती थी आज उनके साथ बैठकर चर्चा कर रहा हूं, यह बड़े सौभाग्य की बात है। आज मनमोहन सरल जी का पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान अविस्मरणीय है। सरोज त्रिपाठी सर ने बताया कि मनमोहन सरल जी ने लगभग 14 वर्ष की आयु में कविताएं लिखना आरंभ कर दिया था। धर्मयुग पत्रिका के संपादक वर्षों तक रहे। नवभारत टाइम्स में सहसंपादक , दैनिक पत्रों में संपादक अनेक कहानी संग्रह लिखना एवं चित्रकला के कलाकारों के साक्षात्कार का संग्रह जिनमें एम.एफ. हुसैन जैसी विभूतियां मौजूद है। इतना ही नहीं मनमोहन सरल जी को अनेक पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। इसके उपरांत श्री सरोज त्रिपाठी जी ने मनमोहन सरल जी को 'पत्रकारिता तब और अब' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। 
                  मनमोहन सर जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि वे सन् 1961 में मुंबई आए थे। वे द्वितीय विश्व युद्ध और आजादी के जश्न के गवाह रहे हैं । उनका मानना था कि तृतीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद देश में प्रसन्नता का माहौल था और लोग खुशियां मना रहे थे क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लड़ाई वर्मा तक पहुंच गई थी और पश्चिम बंगाल पर उसका असर होने वाला था इसलिए द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद लोग प्रसन्न थे । वहीं दूसरी ओर सन 1947 में आजादी के बाद हुए विभाजन के कारण लोग दुखी थे इसलिए आजादी का जश्न नहीं मनाया गया । मनमोहन सरल जी ने बताया कि विभाजन के बाद आम आदमी बहुत दुखी था , वह भारत के टुकड़े नहीं चाहता था लेकिन सत्ता में बैठे लोगों ने इसे कोई महत्व नहीं दिया। सरल जी ने पत्रकारिता की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में पत्रकारिता का आरंभ 'इसाई मशीनरी' ने किया । भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में महात्मा गांधी का योगदान अविस्मरणीय है। गणेश विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने खुद रिपोर्टिंग की, संपादन किया और अख़बार निकाले। उस समय अखबारों में शीर्षक नहीं हुआ करते थे और 'उदंत मार्तंड' जैसे अखबारों में प्रथम और आखिरी पृष्ठ पर विज्ञापन आया करते थे। उन्होंने बताया कि तब पत्रकारिता मिशन हुआ करती थी आजादी का मिशन। आज पत्रकारिता कमिशन बना गया है।  तब समाजसुधार, सच्चाई, ईमानदारी की पत्रकारिता होती थी अब ऐसे लोग हासिए पर चले गए और चाटुकार और कमीशन मीडिया का बोलबाला हो गया है। आज गोदी मीडिया अर्थात फाइनेंस की हुई मीडिया का वर्चस्व है। आज के विषय महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा की व्यवस्था और जनगणना है। शक्तिशाली लोग पैसे के बल पर अपनी मनमर्जी के मुताबिक खबरें छपवाते हैं। कार्यक्रम में आए गरवारे शिक्षण संस्थान के पूर्व छात्र राकेशमणि तिवारी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि, "गुरु का आशीर्वाद और उनका ज्ञान ही सबसे बड़ा अस्त्र है जो हमें कर्तव्य पथ पर अडिग रहने के लिए बाध्य करता है। गरवारे शिक्षण संस्थान संस्कार देता है।" पत्रकारिता यह मुश्किल क्षेत्र है जहां निरंतर प्रयासरत रहना होगा और अपने कार्यकुशलता से क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। कार्यक्रम के अंत  में राजदेव यादव सर सैयद सलमान सर और त्रिपाठी सर ने छात्रों का मार्गदर्शन किया और कार्यक्रम में शामिल छात्रों अफसाना कुरैशी, सुनिल सावंत, धनंजय मिश्रा, लाखन सिंह ठाकुर, पुरुषोत्तम कनौजिया, प्रिंस तिवारी, अनिरुद्ध तिवारी और धीरज गिरी को उनके उज्जव भविष्य की कामना की । अफसाना कुरैशी ने अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों और छात्रों को धन्यवाद दिया ।