Wednesday, November 20, 2019

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युवा शक्ति, शिक्षा और तकनीक / विजय मिश्रा
Monday, September 16, 2019 12:18:38 PM - By विजय मिश्रा

वैश्विक प्रगति और विकास की अगली लहर चौथी औद्योगिक क्रांति द्वारा संचालित की जा रही है
विश्व के आंकड़े बताते हैं कि भारत सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है। बात अगर युवा शक्ति की हो तो आज भारत में दूसरे देशों की तुलना में सबसे ज्यादा युवा हैं। एक मान्यता के अनुसार युवा वर्ग वह वर्ग होता है, जिसमें 14 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग शामिल होते हैं। आज भारत देश में इस आयु के लोग सबसे बड़ी संख्या में मौजूद है। यह एक ऐसा वर्ग है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है। जो अपने परिवार, समाज, देश तथा विश्व के विकास के लिए हर संभव प्रयत्न करते हैं। आज भारत देश में 75 प्रतिशत युवा पढ़ना-लिखना जानता है। आज भारत ने अन्य देशों की तुलना में अच्छी खासी प्रगति की है। इसमें सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है। आज भारत का युवा अच्छी से अच्छी शिक्षा पा रहा है। उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। आज भारत का युवा वर्ग हर क्षेत्र में ऊंचाईयों को छूना चाहता है। विश्वव्यापी नई युवा क्रांति के लिए भारत का युवा वर्ग तैयार है। सरकार नए युग की प्रौद्योगिकियों में उन्नत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक शिक्षा पारिस्थिति की तंत्र का निर्माण कर रही है। निजी कंप्यूटर और इंटरनेट की तीसरी औद्योगिक क्रांति के बाद, वैश्विक प्रगति और विकास की अगली लहर चौथी औद्योगिक क्रांति द्वारा संचालित की जा रही है, जहां कृत्रिम ज्ञान, मशीन सीखने, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3 डी प्रिंटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और उद्योग कैसे संचालित होते हैं, इसकी गतिशीलता को बदलने के लिए 5G का एक साथ विलय होता है।
पिछले कुछ वर्षों में देश की युवा शक्ति ने नई-नई तकनीक को अपनाया है। ऐसे में सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा के पारंपरिक ढांचे में बदलाव की हुई है। वीडियो गेम में मारियो खेलने से निकलकर जो बच्चे प्ले स्टेशन की कई सिरीज तक पहुंच चुके हैं उन्हें महज कागज की किताबों से शिक्षित कर पाना आसान नहीं है। जरूरी है कि शिक्षा को भी उनके नए खेलों जितना मजेदार बनाया जाए, ताकि बच्चा जल्द ही इससे खुद को जोड़ पाए। बदलते परिदृश्य को देखते हुए बाजार ने भी शिक्षा के मद्देनजर खुद को बदला है। किताबें भले ही कागज की हैं लेकिन वे क्यूआर कोड से लैस हैं। स्मार्ट फोन की वन क्लिक वन टच वाली दुनिया में इन किताबों को हाथों हाथ लिया जा रहा है।पारंपरिक तरीकों में बच्चों को कविता, कहानी आदि सुनाकर शिक्षित किया जाता था। घर में दादा-दादी या नाना-नानी वाला माहौल रहने पर यह सहज भी था, लेकिन आज की न्यूक्लियर फैमिली में यह इतना आसान नहीं है। इसके लिए किताब में लेसन के साथ क्यूआर कोड भी बना रहता है, स्मार्ट फोन के जरिये स्कैन करते ही इसका ऑडियो फॉर्मेट सामने आता है। दृश्यात्मक और मजेदार होने से बच्चे इससे अपना पाठ जल्दी याद कर लेते हैं।किसी चैप्टर को समझने के लिए वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र भी किताबों के क्यूआर कोड का बखूबी लाभ ले रहे हैं। इसके जरिये वे घर बैठे प्रोफेसरों के ऑनलाइन लेक्चर सुन रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में एजुकेशन इंडिया ने पाठ्य पुस्तकों के डिजीटल स्वरूप देने की पहल की है। इसके तहत क्यूआर कोड, 2डी-3डी एनिमेशन, ई-बुक व अन्य वीडियो सुविधा के जरिये शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को समृद्ध बनाया जा रहा है।हाल ही में राजधानी में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में किताबों के डिजिटल स्वरूप का जोर-शोर से प्रदर्शन किया गया था। बच्चों की नर्सरी की किताबों से लेकर, बड़े-बड़े लेखकों की ऑडियो बुक, ऑडियो पेन, क्यूआर कोड आदि शामिल रहे थे। दर्शकों ने भी इन्हें हाथों हाथ लिया।डिजिटल बुक की दिशा में काम कर रही संस्था नेक्स्ट एजुकेशन के सह संस्थापक ब्यासदेव ने कहा कि तकनीक की ओर बढ़ते यह कदम एनसीईआरटी के उस आदेश के पूरक हैं जिसमें बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने की बात की गई थी।छात्रों को हाई-क्वालिटी (उच्च क्षमता), क्रॉस-चैनल मल्टीमीडिया कंटेंट मुहैया कराया जा रहा है। स्मार्ट फोन की आसान उपलब्धि के कारण सभी तक इनकी पहुंच हैं व उच्च शिक्षा के 17 लाख से ज्यादा छात्र लाभान्वित हुए हैं। क्यूआर कोड ने शिक्षा की राह को सबसे अधिक आसान बनाया है।यह छात्रों को विषय की व्यापकता से जोड़े रखते हैं। भारत में अब भी किताबें ही सस्ती व सुलभ पढ़ाई का आसान जरिया हैं और तकनीक प्रभावित आज के युवा को तकनीक से लैस सुविधाजनक शिक्षा से जोड़ा जाना जरूरी है।