Tuesday, April 7, 2020

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आम नागरिक की मांग निजीकरण करो सरकार
Sunday, February 16, 2020 - 11:30:08 AM - By पुरुषोत्तम

उद्धव ठाकरे

वर्तमान की केंद्र सरकार एयर इंडिया और भारतीय पेट्रोलियम के साथ - साथ कई सरकारी कंपनियों के विनिवेश करने की तरफ कदम बढ़ा रही है। जिसका कई बुद्धिजीवी विरोध कर रहे हैं।वे कह रहे हैं कि सरकार धीरे - धीरे करके पूरे देश को अंबानी , अदानी के हाथों बेंच रही है।
वैसे जो सरकार कर रही है उसे निजीकरण कहते है । अब सवाल उठता है कि निजीकरण आखिर है क्या -
निजीकरण - यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है। इसका आशय औद्योगिक इकाइयों को निजी क्षेत्र में हस्तांतरित किए जाने से है। जो अभी तक सरकारी स्वामित्व एवम नियंत्रण में थी।
निजीकरण के फायदे
1- विशेषज्ञता. एक निजी उद्योग सभी संबंधित मानवीय और वित्तीय संसाधनों को विशिष्ट कार्यों की ओर केंद्रित करने की क्षमता रखता है। एक राज्य के अधिकार वाली फर्म को अपने सामान्य उत्पादों को  लोगों को बहुत बड़ी संख्या को उपलब्ध कराना होता है, इसलिए उसके पास अपने उत्पादों और सेवाओं का विशिष्टीकरण करने के लिए आवश्यक संसाधन नहीं होते हैं।

भ्रष्टाचार. सरकारी कर्मचारी बहुत सारी सुविधाओं का लाभ अपने सहयोगियों या फिर घूस लेकर दिलाते है। निजीकरण हो जाने से कर्मचारियों की मनमानी कम होगी । जिससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी। आज के समय में जिस किसी भी पार्टी की सरकार आती है वह पार्टी अपने फायदे के लिए सरकारी कंपनियों का दुरुपयोग करती है । जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। निजीकरण हो जाने पर नेताओं की मनमानी भी काम होगी ।
उत्तरदायित्व. निजी स्वामित्व वाली कंपनियों के प्रबंधक अपने मालिकों/शेयरधारकों और उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं और केवल वहीं टिक सकते हैं। जहां जरूरतें पूरी हो रही हों सार्वजनिक स्वामित्व वाली कंपनियों के कर्मचारी अपने उत्तरदायित्व को अच्छे से निभाते नहीं है । वहां पर कोई जवाबदेही तय करने के लिए नहीं बैठा है इसलिए कर्मचारी अपनी मनमर्जी से काम करते हैं। निजी क्षेत्र के मालिक अपने कर्मचारियों से नफा नुक़सान का जवाब मांगते रहते है जिससे कर्मचारी पूरी लगन के साथ काम करते हैं।

नौकरियों के लाभ. जब अर्थव्यवस्था अधिक कुशल हो जाती है, अधिक लाभ प्राप्त होते हैं तथा सरकारी सब्सिडी की जरूरत नहीं रहती, कम करों की जरूरत होती है, निवेश और खपत के लिए अधिक निजी धन उपलब्ध होता है, एक अधिक विनियमित अर्थव्यवस्था की तुलना में बेहतर भुगतान वाली नौकरियों का सृजन होता है।[

निजीकरण के नुक़सान
लाभ. निजी कंपनियों का उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है। एक निजी कंपनी बहुसंख्यकों की आवश्यकताओं की बजाए उन की आवश्यकताओं की पूर्ति करेंगी जो भुगतान करने के सर्वाधिक सक्षम हैं । वस्तु जितनी ज्यादा आवश्यक होगी, उसकी मांग उतनी ही अधिक होगी, क्योंकि क्रेता उसे खरीदेगा ही, मूल्य चाहे जो हो। ऐसी स्थिति में कंपनी कालाबाजारी कर सकती है । जिससे वो अधिक से अधिक कमाई कर सके। इस तरह महंगाई और कालाबाजारी बढ़ सकती है।
नौकरियों की हानि. कंपनियां लोगों से कॉन्टैक्ट पर रखना शुरू कर देंगी। जिससे एक आम आदमी की परमानेंट नौकरी पाने का सपना साकार नहीं हो पाएगा । एक आदमी से ज्यादा से ज्यादा काम लेने की कोशिश की जाएगी जिससे नौकरियों में कमी आ जाएगी। अपने फायदे के लिए कंपनियां रोबोट से काम लेना शुरू कर देंगी जिस वजह से बेरोजगारी बढ़ जाएगी।

निजीकरण को लेकर आम जनमानस में चल रही चर्चा


निजीकरण करने से योग्य लोगों को नौकरियां मिलेंगी, आरक्षण की वजह से अयोग्य लोग भी नौकरियां पा जाते हैं। कई लोग अधिकारियों को पैसा खिलाकर नौकरियां प्राप्त कर लेते हैं। बाद में वो लोग वहीं पैसा आम जानता से वसूलते हैं। निजीकरण हो जाने से ये सब रुक जाएगा जिसका सीधा फायदा हम लोगों को होगा।
विनोद पाटिल ( वॉचमैन )।

निजीकरण हो जाने से परमानेंट जॉब खत्म हो जाएंगी । कंपनियां लोगों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखेंगी। जब कंपनी का घाटा होने लगेगा तो वो लोगों को नौकरी से निकाल देगी । जिसका परिणाम ये होगा कि लोग रोजगार के लिए इधर उधर भटकेंगे। इसलिए निजीकरण नहीं करना चाहिए अगर करना भी है तो सरकार को कॉन्ट्रैक्ट जॉब खत्म कर देना चाहिए।
शैलेश कांबले ( वॉचमैन)

निजीकरण कर देना चाहिए क्योंकि सरकारी कर्मचारी आलसी हो गए हैं। वो अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा रहे हैं। यदि निजीकरण होगा तो उनकी जवाबदेही बढ़ेगी। तब ट्रेन समय पर आएगी और यदि नहीं आएगी तो हमारा भाड़ा वापस मिल जाएगा। वो कटेगा कर्मचारियों कि पगार से तब उनकी समझ में आएगा ।
रोहित ( MPSC STUDENT)

सरकार के पास पैसा नहीं है, इसलिए कंपनी को बंद करने से अच्छा है किसी के हाथों बेंच दे कमसे कम किसी कि नौकरी तो नहीं जाएगी। निजीकरण करने से आने वाले समय में सरकार को फायदा होगा मतलब जनता का फायदा होगा।
साईनाथ मिश्रा ( कांग्रेस युवाध्यक्ष)

लोगों को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, वो अलग बात है कि उन सुविधाओं की ज्यादा कीमत देनी पड़ेगी । अभी क्या कीमत तो कम है उसी के साथ सुविधाएं भी कम ही मिल पाती हैं।हर जगह स्वच्छता बढ़ेगी।
सुनील म्हात्रे( working in swiggy)

युवाओं को समय पर नौकरियां मिलेंगी, आज युवा सरकारी नौकरी के लिए तीन से चार साल तक पढ़ाई करता है। कई बार उसे इतनी मेहनत करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती है । ऐसे में वो बेचारा प्राइवेट नौकरी के लिए जाता है । वहां पर उम्र ज्यादा हो जाने के कारण नौकरी नहीं मिल पाती है। ऐसे में होनहार लोग खेती करने पर मजबूर होते हैं। इस तरह हमारी अपनी क्षमताओं का सही से उपयोग नहीं हो पा रहा है। निजीकरण करने से हमारे देश के युवाओं की क्षमताओं का सही से उपयोग हो सकेगा।
संजीव वैश्य ( मालिक महाकाल ट्रांसपोर्ट)

फिलहाल हमारे देश की अर्थव्यवस्था नीचे हा रही है। सरकार ने एयर इंडिया और एलआईसी जैसी कंपनियों को बेचने का फैसला किया है।मतलब उनका निजीकरण किया जाएगा। लोगों ने एलआईसी में सरकार पर विश्वास करके पैसे लगाए थे । अब उन लोगों का क्या होगा जिनका पैसा एलआईसी में लगा हुआ है। कल को यदि उसका मालिक खुद को दिवालिया घोषित कर दे तो लोगो के पैसे कैसे मिलेंगे।ऐसे अनेक प्रश्न हमारे दिमाग में चल रहे हैं।
‌ ऋतुजा पाटिल ( शिक्षिका)

निजीकरण करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे कंपनियां नए नए ऑफर्स लाएंगी । जिससे लोगों को ही फायदा होगा । अच्छी वस्तुएं काम दाम में मिलेंगी । इन सब कामों के लिए चाहिए नौकर । ऐसे में नई भारतीय भी आएंगी जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
ऋषिकेश ( आईटी इंजिनियर)
निजीकरण करने से विदेश कंपनियां भारत में निवेश करेगी। जिससे भारत का रुपया मजबूत होगा । भारतीय कंपनियां अपना माल विदेशों में आसानी से के जाकर बेंच सकेंगी जिससे अन्य देशों के साथ हमारा सांस्कृतिक आदान प्रदान बढ़ेगा। एलआईसी बिकने नहीं जा रही है बस लोगों में यह अपवाह फैलाई जा रही है ।
गिरीश भट ( एलआईसी कर्मचारी)