Wednesday, December 19, 2018

न्यूज़ अलर्ट
1) गाँधी जयंती पर 'मारवा' का स्वच्छता अभियान.... 2) मुंबई विद्यापीठ से संबद्ध कॉलेजों में 29 सितम्बर तक प्रवेश.... 3) मुंबई और आसपास के इलाकों में ठंडी हवा के साथ बारिश.... 4) राफेल डील पर एनसीपी बैकफुट पर- सफाई, देते हुए कहा शरद पवार ने मोदी को नहीं दी क्लीन चिट.... 5) सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ- पराक्रम पर्व का पीएम ने किया उद्घाटन.... 6) पेट्रोल डीजल की कीमतों में फिर बड़ी बढ़ोतरी.... 7) सार्क मीटिंग में सुषमा स्वराज ने किया नजरअंदाज तो भड़का पाकिस्‍तान, जताई नाराजगी....
शकील आज़मी की पुस्तक 'परों को खोल' का सुभाष घई के हाथों हुआ विमोचन
Saturday, September 16, 2017 - 9:18:47 AM - By संवाददाता

भव्य समारोह की तस्वीरी झलकियां
'परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है,
ज़मीं पर बैठकर क्यों आसमान देखता है….'

ऐसी प्रेरक पंक्तियों के रचयिता मशहूर शायर शकील आज़मी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इस बार वे चर्चा में आए हैं अपनी शायरी और ग़ज़लों की किताब 'परों को खोल' को लेकर। देवनागरी में लिखी इस पुस्तक का पिछले दिनों भव्य समारोह में फिल्म इंडस्ट्री के शोमैन सुभाष घई जी के हाथों विमोचन किया गया। इस अवसर पर एक भव्य मुशायरे का भी आयोजन किया गया जिसमें शकील आज़मी के अलावा अख़्तर जमाल, पंछी जालौनवी, शकील अहमद शकील, प्रज्ञा विकास, स्वप्निल तिवारी और उमर फ़ारूक़ ने शिरकत की। कार्यक्रम में साहित्यजगत की कई मशहूर शख़्सियत के अलावा बड़ी संख्या में शकील आज़मी के चाहने वाले मौजूद थे।
उपस्थित मेहमानों का मानना था कि शकील आज़मी की पुस्तक 'परों को खोल' प्रशंसनीय और पठनीय है।
पुस्तक के चंद अशआर जो दिल को छू जाते हैं वे हैं,


जिंदगी की नई उड़ान थे हम,
अपनी मिट्टी में आसमान थे हम...

मैं वह मौसम जो अभी ठीक से छाया भी नहीं,
साज़िशें होने लगी मुझको बदलने के लिए...

धुआं-धुआं है फ़ज़ां रोशनी बहुत कम है,
सभी से प्यार करो ज़िन्दगी बहुत कम है...

चंद हीरो को ही मिलता है चमकने का नसीब,
काम सब करते हैं शोहरत नहीं मिलती सबको....